बॉलीवुड में रीमेक का ट्रेंड पुराना है, लेकिन 2024-2025 में यह और तेज हो गया। दक्षिण और गुजराती फिल्मों के रीमेक से इंडस्ट्री ने कई हिट्स तो दिए, लेकिन ज्यादातर फ्लॉप साबित हुए। गुल्टे और बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट्स के अनुसार, पॉस्ट-पैंडेमिक 25 रीमेक्स में से 23 फ्लॉप हो चुके हैं। क्या यह ट्रेंड खत्म होना चाहिए?
सफल रीमेक्स के उदाहरण
‘फार्रे’ (2023) एक सस्पेंस थ्रिलर का रीमेक था, जो बॉक्स ऑफिस पर हिट रहा। ‘सावी’ (2024) एक्शन ड्रामा ने दर्शकों को बांधा। लेकिन ‘सरफिरा’ (2024) अक्षय कुमार की ‘सूररई पोटरू’ रीमेक फ्लॉप हो गई, क्योंकि ओरिजिनल की तुलना में कमजोर बनी।
‘खेल खेल में’ (2024) कॉमेडी रीमेक था, लेकिन ‘बेबी जॉन’ (2024) और ‘देवा’ (2025) ने निराश किया।
असफलताओं के कारण
ट्रेड एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रीमेक में ओरिजिनल की भावना खो जाती है। 2024 में पैन-इंडियन रीमेक्स जैसे ‘शहजादा’ और ‘अंतिम’ फ्लॉप हुए। एनडीटीवी की ओपिनियन में कहा गया कि बॉलीवुड को ओरिजिनल स्क्रिप्ट्स पर फोकस करना चाहिए।
ट्रेंड का विश्लेषण
रीमेक सेफ लगते हैं, लेकिन दर्शक अब फ्रेश कंटेंट चाहते हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट कहती है कि फ्रैंचाइजी और रीमेक से रिस्क कम होता है, लेकिन 2025 में फ्लॉप्स ने सबक सिखाया।
रीमेक हिट-फ्लॉप का खेल है। तारण आदर्श की अपील सही है – रीमेक बंद करो, ओरिजिनल बनाओ। क्या आप सहमत हैं?

