गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो राधा रमण हरि, गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो ॥
अंतरा 1 कृष्ण कृष्ण हरि हरि, कृष्ण कृष्ण हरि हरि कृष्ण कृष्ण हरि हरि, राधे राधे ॥ गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो…
अंतरा 2 मुरली मनोहर श्याम सुंदर, नंदलाला गिरिधारी रे बंसी बजैया ब्रज की गलिन में, राधा के संग डारी रे ॥ गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो…
अंतरा 3 माखन चुराने वाला, मटकी फोड़ने वाला गोपियों के संग रास रचाने वाला ॥ राधा वल्लभ, श्यामा प्यारी का प्यारा मोरे अंगना में आओ नंद किशोरा ॥ गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो…
अंतरा 4 कंस मथुरा में डरपे, मामा कंस को मारो रे कंस चाणूर मल्ल विदारय, कुश्ती में ललकारो रे ॥ गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो…
अंतरा 5 द्वारका में राज करो, रुक्मिणी जी के साथ रहो राधा जी को ना भूलना, वृंदावन की याद रखना ॥ गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो…
अंतरा 6 (तेज़ लय में – कीर्तन में सब झूमते हैं) राधे गोविंद… राधे गोविंद… राधे गोविंद… राधे गोविंद… राधे गोविंद… राधे गोविंद… राधे गोविंद… राधे गोविंद… गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो…
अंतरा 7 (अंतिम – धीमी भावपूर्ण लय) जो कोई नर इस भजन को गावे मन वांछित फल निश्चय पावे ॥ भव सागर से तर जाए प्राणी राधा-कृष्ण चरणों में लग जाए ठानी ॥
अंत में जयकारे (जोर-जोर से बोलें)
- राधे-राधे !
- गोविंद बोलो ! हरि गोपाल बोलो !
- जय श्री कृष्ण ! जय राधे-श्याम !
- जय जय श्री राधे !
- हरे कृष्ण हरे राम !
यह भजन जितनी बार गाओ, उतना ही आनंद आता है। कीर्तन में सब एक साथ नाचते-झूमते हैं और पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
राधे राधे 🙏🦚✨🪔

