नवंबर 2025 में जब दुनिया सेमीकंडक्टर की कमी और जलवायु संकट से जूझ रही है, तब गुजरात एक साथ दोनों मोर्चों पर वैश्विक समाधान बनकर उभरा है। यह अब सिर्फ़ भारत का सबसे समृद्ध और उद्यमी राज्य नहीं रहा, बल्कि दुनिया का सबसे तेज़ बढ़ता सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग हब और सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी उत्पादक भी बन चुका है। २०२५-२६ के बजट में गुजरात का जीएसडीपी पहली बार २५ लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है। प्रति व्यक्ति आय ३.९ लाख रुपये के साथ यह देश में दूसरे नंबर पर है (दिल्ली के बाद)। लेकिन ये आंकड़े सिर्फ़ शुरुआत हैं। असली कहानी धरती पर चल रहे उन मेगा प्रोजेक्ट्स की है, जो गुजरात को २०३० तक दुनिया के टॉप-३ टेक्नोलॉजी और ग्रीन एनर्जी हब में शामिल करने वाले हैं।
सेमीकंडक्टर क्रांति: धोलेरा से साणंद तक
गुजरात ने २०२५ में वह कर दिखाया, जो दुनिया के सिर्फ़ ४-५ देश ही कर पाते हैं – २८nm से लेकर ५nm तक चिप्स का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू।
- धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन (DSIR) में ताइवान की Powerchip Semiconductor Manufacturing Corporation (PSMC) का ११ बिलियन डॉलर (लगभग ९२,००० करोड़ रुपये) का २८nm फैब प्लांट नवंबर २०२५ में ट्रायल प्रोडक्शन शुरू कर चुका है। २०२६ के मध्य तक यहाँ हर महीने ५०,००० वेफर्स निकलेंगे। यह भारत का पहला और एशिया का तीसरा सबसे बड़ा सेमीकंडक्टर फैब होगा।
- साणंद में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और माइक्रोन टेक्नोलॉजी का २२,५०० करोड़ रुपये का ATMP (Assembly, Testing, Marking & Packaging) प्लांट मार्च २०२५ से चालू है। यहाँ ५nm तक की मेमोरी चिप्स पैक की जा रही हैं।
- अहमदाबाद के पास CG Power और रेनेसास (जापान) का ७,६०० करोड़ का प्लांट ऑटोमोटिव और इंडस्ट्रियल चिप्स बना रहा है।
- कुल मिलाकर २०२५ तक गुजरात में १.५ लाख करोड़ रुपये से अधिक का सेमीकंडक्टर निवेश आ चुका है और ७५,००० से अधिक हाई-स्किल जॉब्स पैदा हुई हैं।
गुजरात सरकार ने “गुजरात सेमीकंडक्टर पॉलिसी २०२२-२७” में ४०% कैपिटल सब्सिडी, २० साल तक १००% बिजली सब्सिडी और जीरो स्टांप ड्यूटी दी है। यही कारण है कि अब ताइवान की दूसरी बड़ी कंपनी UMC और अमेरिका की GlobalFoundries भी धोलेरा में प्लांट लगा रही हैं।

