आस्था क्या है? एक साधारण इंसान की नजर से

आस्था। यह शब्द सुनते ही मन में एक गहरी शांति और विश्वास का भाव जागता है। लेकिन आस्था आखिर है क्या? कोई इसे धर्म से जोड़ता है, कोई इसे ईश्वर पर विश्वास कहता है, तो कोई इसे जीवन का सहारा मानता है। मेरे लिए आस्था वह अदृश्य धागा है जो हमें टूटने नहीं देता, चाहे जीवन में कितनी भी तूफानी रातें आएँ।

आस्था का जन्म अक्सर उन पलों में होता है जब हम सबसे कमजोर होते हैं। जब डॉक्टर कह देते हैं कि अब कुछ नहीं हो सकता, जब सबसे प्रिय इंसान साथ छोड़ जाता है, जब सारे दरवाजे बंद दिखाई देते हैं – ठीक उसी वक्त कहीं से एक छोटी-सी किरण निकलती है और हम कह उठते हैं, “भगवान है, सब ठीक हो जाएगा।” यही आस्था है। यह तर्क से परे है, यह विज्ञान के दायरे से बाहर है, फिर भी यह सबसे मजबूत होती है।

मैंने देखा है कि जिनके पास धन है, पद है, ताकत है – वे भी किसी न किसी बात पर आस्था रखते हैं। कोई अपने कुलदेवता पर, कोई अपने गुरु पर, कोई अपने बच्चों के भविष्य पर। आस्था का रूप बदलता है, लेकिन उसका सार एक ही रहता है – विश्वास।

आस्था हमें सिखाती है धैर्य। एक किसान जब बीज बोता है तो उसे पता है कि फसल आने में समय लगेगा। वह रोज खेत में पानी डालता है, खरपतवार हटाता है, और मन ही मन प्रार्थना करता है। यह प्रार्थना ही उसकी आस्था है। अगर वह बीच में हार मान ले तो फसल कभी नहीं आएगी।

आस्था हमें डर से आजाद करती है। जब हम यह मान लेते हैं कि कोई ऊपर वाला हमारी रक्षा कर रहा है, तो मृत्यु का भय कम हो जाता है। कबीरदास जी ने कहा था – “कबीरा खड़ा बाजार में, मांगे सबकी खैर। ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर।” यह आस्था का ही कमाल था कि वे निर्भय होकर जीवन जी सके।

लेकिन आस्था का गलत उपयोग भी होता है। जब लोग अंधविश्वास के नाम पर दूसरों का शोषण करते हैं, जब तथाकथित बाबा करोड़ों कमाते हैं, जब धर्म के नाम पर नफरत फैलाई जाती है – तब यही आस्था जहर बन जाती है। इसलिए सच्ची आस्था वही है जो मनुष्य को मनुष्य से जोड़े, न कि तोड़े।

आज के युग में जहाँ हर चीज को तर्क की कसौटी पर कसा जा रहा है, वहाँ भी आस्था जीवित है क्योंकि इंसान सिर्फ तर्क से नहीं जीता। वह भावनाओं से जीता है, उम्मीद से जीता है। एक बच्चा जब माँ की गोद में सोता है तो उसे यह तर्क नहीं करता कि माँ उसे गिरने नहीं देगी – वह बस विश्वास करता है। यही आस्था का सबसे खूबसूरत रूप है – निःस्वार्थ विश्वास।

अंत में यही कहूँगा – आस्था कोई कमजोरों का सहारा नहीं है। यह सबसे ताकतवर हथियार है। जिसके पास आस्था है, वह कभी हारा हुआ नहीं होता, भले ही दुनिया उसे हारा हुआ घोषित कर दे।

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