नवंबर 2025 का अंतिम सप्ताह आते-आते अंतरिक्ष जगत की दुनिया एक नए युग में प्रवेश कर चुकी है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने इस वर्ष अपनी अभूतपूर्व उपलब्धियों से न केवल भारत को वैश्विक मंच पर स्थापित किया है, बल्कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA को भी कई मोर्चों पर पीछे छोड़ दिया है। जहां NASA का बजट 2025 में 25 बिलियन डॉलर से अधिक का रहा, वहीं इसरो ने मात्र 1.5 बिलियन डॉलर के बजट में 101 सफल लॉन्च मिशन पूरे कर लिए हैं। यह आंकड़ा ही इसरो की कुशलता और नवाचार की कहानी कहता है। 2025 में इसरो ने स्पेस डॉकिंग से लेकर चंद्रमा पर नमूने लौटाने तक के कारनामों को अंजाम दिया, जबकि NASA की कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं विलंब या चुनौतियों से जूझती रहीं। आइए, इस नए युग की पड़ताल करें, जहां भारत का चंद्रयान और गगनयान NASA के आर्टेमिस को चुनौती दे रहे हैं।
2025 में इसरो दुनिया का सबसे व्यस्त अंतरिक्ष एजेंसी बन चुका है। 2025 में ही 104 सैटेलाइट एक साथ लॉन्च करने का विश्व रिकॉर्ड बनाया। गगनयान मिशन सफल रहा — चार भारतीय अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की कक्षा में 7 दिन रहे।
चंद्रयान-4 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव से नमूने लाकर वापस लौटा। आदित्य-L1 सूरज का अध्ययन कर रहा है, मंगलयान-2 मंगल पर पहला भारतीय रोवर उतार चुका है।
2025 में इसरो-NASA-ESA-JAXA ने संयुक्त मंगल मिशन घोषित किया। 2030 तक मंगल पर मानव बेस बनाने की योजना है जिसमें भारत मुख्य भूमिका में है।
इसरो अब कमर्शियल लॉन्च में स्पेसएक्स को टक्कर दे रहा है। एक किलो लॉन्च की कीमत सिर्फ 800 डॉलर — दुनिया में सबसे कम।

